जब फ़ांसी की सज़ा से बचने के लिए गैलेलिओ ने चर्च से क्षमा मांग ली तो उसके एक अनुयायी ने गुस्से और निराशा में टिप्पणी की: 'कितना अभागा होता है वह समाज, जिसका कोई नायक नहीं होता।' महान वैज्ञानिक गैलेलियो का उत्तर था :' लेकिन उससे अभागा होता है वह समाज, जिसे नायक की ज़रूरत होती है।' |